सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकारी नौकरियां कर रहे अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के लिए प्रमोशन में आरक्षण मिलेगा. इसका फैसला केंद्र और राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है. इसके लिए सरकारों को काडर के हिसाब से ये आंकड़े जमा करने होंगे कि इस समुदाय को नौकरी में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है या नहीं. महत्वपूर्ण चुनावों से पहले आया यह फैसला बीजेपी के लिए बड़ी राहत है. बीजेपी एससी/एसटी वर्ग को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है. इसी रणनीति के तहत खुद केंद्र सरकार ने ही सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वे अपने उस पुराने फैसले को विचार के लिए बड़ी बेंच में भेजे जिसमें कहा गया था कि प्रमोशन में आरक्षण नहीं होगा. यही वजह है कि अटॉर्नी जनरल ने एससी/एसटी वर्ग पर क्रीमी लेयर का नियम लागू करने और उनके पिछड़ेपन के आंकड़े तय करने का विरोध किया था.
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