पांच साल पहले प्रधानमंत्री ने आदर्श गांव योजना शुरू की. कहा कि हर सांसद एक-एक गांव गोद लेगा। उसे आदर्श गांव बनाएगा. 2019 तक तीन गांवों को आदर्श बनाने की बात थी. ऐसे आदर्श गांवों को लेकर तरह-तरह के एलान हुए. बताया गया कि इस आदर्श गांव में सबके पास अपना घर होगा, घर में बिजली होगी, पानी आएगा और घर तक सड़क भी होगी. मामूली-मामूली समस्याएं नहीं होंगी. स्कूल होंगे, लड़कियों के लिए कॉलेज होंगे. नोटबंदी के दौर में कुछ गांवों में बैंक भी खुल गए, एटीएम भी खुल गए, दुकान-दुकान ऑनलाइन कारोबार की मशीनें भी बंट गईं. लेकिन ये सारी सजावट टिकी नहीं. जिन सांसदों ने गोद लिया, वो अपने गावों को जैसे भूल गए लगते हैं.
from Videos https://ift.tt/2FAlcsh
No comments:
Post a Comment