आदर्श गांवों का यथार्थ बहुत करुणा से भरा है. सहारनपुर के सांसद राघव लखनपाल ने शब्बीरपुर नाम के गांव को गोद लिया. लेकिन इस दौरान ये गांव दंगे में भी झुलसा. गोद लेने वाले सांसद महोदय एक बार भी उसके बाद इस गांव तक नहीं आए. गांव के भीतर की सड़कें अब तक कच्ची हैं. खुले में शौच मुक्त होने का सपना अभी तक सपना है. गांववालों को उम्मीद थी कि यहां जो स्कूल चल रहा है, वह आठवीं से बारहवीं का हो जाएगा. लेकिन पांच साल में इस स्कूल में एक ईंट तक नहीं रखी गई. लड़कियों को आठवीं के बाद पढ़ाई करने के लिए सात किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. रास्ते में शोहदे होते हैं जो छेड़ख़ानी करते हैं. कई बच्चियों की पढ़ाई छुड़ा दी गई है.
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