निर्भया के पिता ने दोषियों को फांसी के बाद कहा, 'जब घटना हुई तो हमनें आंख नहीं बंद की, आंख खोलकर हम चलें सड़क पर और न्याय के लिए दर-दर दौड़ना पड़ा, भटकना पड़ा लेकिन भटके और न्याय पाए. हमारा पिता का दायित्व क्या है, वो हमें समझने की जरूरत है. उन पिताओं से हमारी अपील है कि बेटा और बेटी में फर्क मत रखो. अपने दायित्वों को समझो. दो बच्चे हैं, एक बेटा है और एक बेटी तो दोनों के अधिकार बराबर हैं.'
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